BREAKING NEWS
post viewed 23 times

जितनी मशहूर कोहिनूर की चमक है, उतने ही मशहूर है उससे जुड़ी ये 6 अफ़वाहें

150397985

आज़ादी को मिले बेशक 70 साल से ऊपर हो गए हों, पर आज भी ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं. ये लड़ाई है अपनी संस्कृति की, अपनी सभ्यता की, जिसके तले आज भी हमारा इतिहास ब्रिटिश म्यूज़ियम और क्वीन विक्टोरिया के सिर के ताज की शोभा बना हुआ है. इसे हमारा अधूरा ज्ञान ही कह लीजिये कि हमें कोहिनूर हीरा तो याद है, पर कोहिनूर के अलावा हम बहुत-सी चीज़ों को भूल जाते हैं. इसमें हमारी भी कोई गलती नहीं है, आखिर कोहिनूर की चमक है ही ऐसी कि किसी को भी अपनी तरफ खींच लें. इतना तो आप समझ ही गए होंगे कि आज हम आपको कोहिनूर के बारे में बताने वाले हैं. पर न तो आज हम आपको कोहिनूर का इतिहास बताने वाले और न ही उसके गुण, बल्कि हम कोहिनूर के बारे में फैले उन मिथ्स से आपका तार्रुफ़ करवा रहे हैं, जिन्हें अब तक लोग सच मानते आये हैं.

कोहिनूर एक भारतीय हीरा है.

ये एक ऐसा मिथ है, जिसे न जाने हम कितने सालों से सही मानते आ रहे हैं. पर हक़ीक़त ये है कि कोहिनूर के अलावा एक अन्य ऐसा हीरा है, जिसका संबंध भारत से रहा है. दरिया-ए-नूर एक ऐसा ही हीरा है, जिसे कोहिनूर की बहन भी कहा जाता है. फ़िलहाल ये हीरा तेहरान की शान है. इन दोनों हीरों को ईरानी नादेर शाह अपने साथ लूट कर ले गया था. 19 शताब्दी में ये हीरा फिर से पंजाब पहुंचा और प्रसिद्ध हुआ. हालांकि आज इस हीरे पर पाकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और हिंदुस्तान अपना दावा करते हैं.

आज भी पहले की तरह ही पूरा है कोहिनूर.

लोगों का मानना है कि कोहिनूर उन एकलौते हीरों में से एक है, जो आज भी पहले की तरह ही अपने आप पूरा है. जबकि हक़ीक़त कहती है कि रानी विक्टोरिया के ताज़ पर लगाने से पहले प्रिंस अल्बर्ट ने इसे फिर से तराशा था, जिससे इसकी चमक बढ़ गई थी.

कुल्लूर की खानों में पाया गया था कोहिनूर.

कोहिनूर कहां और कैसे आया, इसके बारे में आज तक कई कहानियां फैली हुई हैं. भगवद पुराण में कोहिनूर पर राजा स्यमंतक का अधिकार बताया गया है.

Theo Metcalfe की रिपोर्ट के अनुसार कोहिनूर का जिक्र भगवान कृष्ण के काल में ही हो चुका था. इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि ये किसी खान से मिला था, पर हां ये सच है कि पहली बार इसे दक्षिण भारत में ही देखा गया था.

मुगलों की शान का प्रतीक था कोहिनूर.

ये तो हम सब जानते हैं कि मुगलों के दौर में हीरे-जवाहरात और सोने-चांदी अपने चरम पर थे, पर ये कहना कि ये मुगलों की शान का प्रतीक था थोड़ा मुश्किल लगता है, क्योंकि मुगलों के दौर में हिन्दू हीरे का प्रयोग गहनों के रूप में करते थे. जबकि मुगल बस इसे एक चमकदार पत्थर कहा करते थे.

मुहम्मद शाह रंगीला की पगड़ी से चोरी हो गया था.

कोहिनूर के इर्द-गिर्द बुनी हुई कई कहानियों में से एक कहानी ये भी है कि मुहम्मद शाह इस कीमती हीरे को इतना चाहते थे कि वो इसे अपनी पगड़ी में छिपा कर रखते थे. जब नादिर शाह ने भारत पर आक्रमण किया तो मुहम्मद शाह से मिलने आया और उनकी नज़रों से छिप कर वो हीरा निकाल कर ले गया.

पर ईरानी इतिहासकार Marvi की माने तो ऐसा कहीं भी जिक्र नहीं मिलता, बल्कि ये हीरा मुगल बादशाह शाहजहां के मयूर सिंहासन में एक आम से पत्थर की तरह लगा हुआ था.

कोहिनूर को काट कर तराशने के लिए वेनिस से एक व्यक्ति को बुलाया गया था.

फ्रेंच सौदागर और यात्री Jean-Baptiste Tavernier के वर्णन के मुताबिक, मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने उन्हें उनका शाही खजाना देखने की अनुमति दी थी. औरंगज़ेब की आज्ञा से सात समंदर पार से Hortensio Borgio नाम के एक तराशकर को हीरा तराशने के बुलाया गया था, जिसने हीरे को तराशते-तराशते उसे छोटा कर दिया था.

पर इतिहासकारों की मानें, तो ये हीरा शाहजहां द्वारा हीरे के सौदागर मीर जुमला को उपहार के तौर पर दिया गया था. मुगलों के पास हीरों का भंडार था और जिस हीरे की बात Jean-Baptiste Tavernier ने की है, वो असल में Orlov था, जो आज रूस के Treasures of the Diamond Fund, Gokran का हिस्सा है.

SHAREShare on Facebook0Share on Google+0Tweet about this on TwitterShare on LinkedIn0

Be the first to comment on "जितनी मशहूर कोहिनूर की चमक है, उतने ही मशहूर है उससे जुड़ी ये 6 अफ़वाहें"

Leave a comment

Your email address will not be published.


*