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रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अप्रैल में जाएंगी चीन, जानें क्यों अहम है यह यात्रा

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डोकलाम गतिरोध के बाद दोनों देशों बीच संबंधों में आए तनाव के मद्देनजर यह एक अहम यात्रा होगी

 नई दिल्ली: रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि वह अगले महीने चीन की यात्रा पर जाएंगी. डोकलाम गतिरोध के बाद दोनों देशों बीच संबंधों में आए तनाव के मद्देनजर यह एक अहम यात्रा होगी. रक्षा मंत्री ने अपनी चीन यात्रा पर एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘ हां, यात्रा संभवत: अप्रैल के आखिर में कभी होगी.’’

डोकलाम विवाद के बाद भी भारत-चीन के बीच तनावपूर्ण हैं रिश्ते
गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में भारत और चीन ने डोकलाम में दोनों देशों के सैनिकों के बीच 73 दिनों से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने का फैसला किया था. इस गतिरोध के चलते दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव आ गया था. डोकलाम से भारत और चीन द्वारा अपने-अपने सैनिकों को हटाए जाने के बावजूद इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच संबंधों में जमी बर्फ अब तक नहीं पिघली है.

  1. अप्रैल में चीन जाएंगी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण
  2. डोकलाम विवाद के बाद इस यात्रा को अहम माना जा रहा है
  3. रक्षा मंत्री ने कहा  यात्रा संभवत: अप्रैल के आखिर में कभी होगी

चीन ने भारत की सकारात्मक प्रतिक्रिया का स्वागत किया
वहीं चीन ने पारस्परिक सम्मान और एक- दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर बीजिंग के साथ मतभेदों को सुलझाने की भारत की इच्छा को‘ सकारात्मक’ बताकर उसका स्वागत किया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग की टिप्पणी तब आई जब भारत ने कहा कि वह मतभेदों से पारस्परिक सम्मान और एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता से निपटने के दौरान समानता के आधार पर संबंधों को विकसित करने के लिए चीन के साथ काम करने को इच्छुक है.

 ‘हमने भारत की सकारात्मक टिप्पणी पर गौर किया है’
द्विपक्षीय संबंधों पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी की हालिया टिप्पणी पर भारत की प्रतिक्रिया से जुड़े एक सवाल के जवाब में लू ने कहा, ‘‘ हमने भारतीय पक्ष की तरफ से इस तरह की सकारात्मक टिप्पणी पर गौर किया है.’’ लू ने कहा, ‘‘ हम अपने पारस्परिक राजनैतिक भरोसे में सुधार, पारस्परिक लाभकारी सहयोग को बढ़ाने, अपने मतभेदों से प्रभावी तरीके से निपटने और हमारे संबंधों के विकास के लिए सही पथ सुनिश्चित करने के लिए मार्गदर्शक के तौर पर दोनों नेतृत्व के बीच महत्वपूर्ण आम सहमति बनाने के लिए भारतीय पक्ष के साथ काम करने के इच्छुक हैं.’’

उन्होंने कहा कि वांग ने भारत के साथ चीन के संबंधों पर उसके बुनियादी रुख के बारे में विस्तार से बातें रखी हैं. वांग ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि भारत और चीन को संदेह छोड़ना चाहिये और बैठक के जरिये मतभेदों को दूर करना चाहिये. इस बयान के जरिये वांग ने डोकलाम विवाद के बाद नयी दिल्ली के खिलाफ चीन द्वारा अपनाए गए सख्त रुख में नरमी का संकेत दिया था.

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