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बिहार में कांग्रेस का ‘वनवास’ खत्म, 14 साल बाद पार्टी को मिलेगा राज्यसभा सांसद

RJD-Congress

आज भी जब पार्टी का कोई नेता राज्यसभा जा रहा है तो इसमें राष्ट्रीय जनता दल का सहयोग महत्वपूर्ण है.

नई दिल्ली. आगामी 23 मार्च को राज्यसभा के लिए होने वाले चुनावों में बिहार कांग्रेस इतिहास बनाएगी. कभी देश के हर राज्य में अपना परचम लहराने वाली पार्टी आज देश में महज एक-दो राज्यों में संघर्षशील दिख रही है. हिन्दी हृदयप्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश में तो पार्टी के नाम पर चंद लोग ही बचे हैं. ऐसे में बिहार में जब 2015 के विधानसभा चुनाव हुए, तो महागठबंधन के बहाने ही सही, पार्टी के विधायकों की तादाद बढ़ी, जिसके कारण आज ये नौबत आ सकी है कि पार्टी का कोई नेता राज्यसभा में चुनकर जा रहा है. वरना पिछले 14 साल यानी लगभग डेढ़ दशक से पार्टी को बिहार से ‘नील बटे सन्नाटा’ का ही सामना करना पड़ता था. हालांकि आज भी जब पार्टी का कोई नेता राज्यसभा जा रहा है तो इसमें राष्ट्रीय जनता दल का सहयोग महत्वपूर्ण है. यह पार्टी के लिए 14 साल का ‘वनवास’ खत्म होने जैसा है.

 HIGHLIGHTS
  • वर्ष 2004 में राजद के सहयोग से आर. के. धवन बने थे राज्यसभा सांसद

  • राजद गठबंधन की ओर से तीन प्रत्याशियों को उच्च सदन का मिला टिकट

  • राजग गठबंधन से भी भाजपा के एक और जदयू के दो प्रत्याशी जाएंगे राज्यसभा

उस समय भी राजद ने ही पार कराई थी नैया
दरअसल, 14 साल के बाद बिहार से कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह के राज्यसभा सदस्य चुने जाने की संभावना है. इससे पहले वर्ष 2004 में पार्टी के नेता आर.के. धवन यहां से बतौर कांग्रेस प्रतिनिधि राज्यसभा पहुंचे थे. उस समय भी कांग्रेस के पास बिहार में किसी को अपने बलबूते राज्यसभा भेजने की विधायक क्षमता नहीं थी. तब कांग्रेस की मदद के लिए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आगे आए थे. राजद के विधायकों के मत पाकर आर.के. धवन राज्यसभा पहुंच सके थे. आज लालू यादव प्रत्यक्ष तौर पर कांग्रेस की मदद के लिए नहीं हैं, लेकिन उनकी पार्टी फिर देश की इस सबसे पुरानी पार्टी की प्रतिष्ठा बचाने को आगे आई है.

राज्यसभा चुनाव के लिए ऐसा है मतों का गणित
बिहार से कांग्रेस अपने दम पर आज भी किसी को राज्यसभा भेजने की स्थिति में नहीं है. क्योंकि विधानमंडल में उसके सदस्यों की संख्या इतनी नहीं है कि किसी को संसद के उच्च सदन में भेजा जा सके. राजद इसमें सहयोग करेगा. दरअसल, राजद के दो प्रत्याशियों के लिए 70 विधायकों का वोट चाहिए. बिहार में वर्तमान समय में राजद के पास इससे ज्यादा विधायक हैं. उसके पास 9 और अतिरिक्त वोट हैं. वहीं, कांग्रेस के पास कुल 27 विधायक हैं. ऐसे में राजद के 9 और कांग्रेस के 27 विधायक मिलाकर एक व्यक्ति को राज्यसभा भेजा जा सकता है. इसी गणित से कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह के राज्यसभा पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है.

बिहार से सभी छह उम्मीदवारों का राज्यसभा जाना तय
राज्यसभा चुनाव में बिहार से राजग और राजद गठबंधन के कुल छह प्रत्याशी इस बार मैदान में हैं. सोमवार को चुनाव के नामांकन का अंतिम दिन था. इस दिन दोनों गठबंधनों के तीन-तीन प्रत्याशियों ने पर्चे दाखिल किए. इनमें राजग की ओर से भाजपा नेता व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह व उद्योगपति महेंद्र प्रसाद उर्फ किंग महेंद्र शामिल हैं. वहीं, राजद की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज कुमार झा, कटिहार मेडिकल कॉलेज के एमडी अहमद अशफाक करीम और कांग्रेस के डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह शामिल हैं. प्रदेश में दोनों गठबंधनों की मौजूदा विधायक क्षमता को देखते हुए सभी छह प्रत्याशियों का निर्वाचन तय है.

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