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पापमोचनी एकादशी: क्‍यों मनाया जाता है और क्‍या है इसका महत्‍व

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नई दिल्‍ली: पापमोचनी एकादशी चैत्र मास की कृष्‍ण पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है. पापमोचनी एकादशी व्रत सभी पापों को नाश कर मोक्ष का द्वार खोलती है. इसलिए इसे पापों को नाश करने वाली एकादशी भी कहा जाता है. इस बार पापमोचनी एकादशी 13 मार्च यानी मंगलवार को है.

जानिये विधि:
पापमोचनी एकादशी के दिन भगवान विष्‍णु की पूजा की जाती है. उवासित को इससे पूर्व की अवधि में भी सात्‍व‍िक भोजन करना चाहिए. यह व्रत 24 घंटे का होता है इसलिए इसे करने से पहले खुद को मानसिक रूप से तैयार कर लें. एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्‍णु का स्‍मरण करें. कुछ लोग इस दिन निर्जल व्रत रखते हैं तो कुछ लोग फलाहारी या जलीय व्रत रखते हैं.

पापमोचनी एकादशी की रात भी भक्‍तों को जाग कर भगवान विष्‍णु का पाठ करना चाहिए. व्रत वाले दिन सूर्य उदय से पहले उठें और स्‍नान करने के बाद सूर्य को व केले के पेड़ को जल चढ़ाएं. व्रत का संकल्‍प लें और इसके बाद भगवान विष्‍णु की पूजा करें. भगवान् विष्णु को पीले फूल अर्पित करें. पूजा के पश्‍चात भगवान विष्‍णु के सामने बैठकर श्रीमद्भागवत का पाठ करें. चाहें तो श्री हरी के मंत्र का जाप भी कर सकते हैं. मंत्र होगा – ॐ हरये नमः.

इस दिन व्रत के दौरान रात्र‍ि जागरण करने से एकादशी का कई गुना फल प्राप्‍तहोता है. व्रत की रात कुछ ना खाएं तो बेहतर. एकादशी के दिन भोग विलास के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए. इस अवधि में किसी भी प्रकार के बुरे विचार नहीं लाने चाहिए. व्रत करने पर व्रत की कथा का श्रवण आवश्‍य करना चाहिए.

कैसे खोले व्रत
यह व्रत द्वादशी के दिन खुलता है. सुबह सूर्य उगने से पहले स्‍नान करें और उसके बाद भगवान विष्‍णु की पूजा करने के बाद पंडित को दक्ष‍िणा दें और उसके बाद व्रत खोलें.

इसका महत्‍व
व्रतों में एकादशी का महत्‍व सबसे अधिक होता है. इसमें भी पापमोचनी एकादशी को सर्वश्रेष्‍ठ एकादशी मानते हैं, क्‍योंकि इसे करने से सभी पापों का नाश हो जाता है. एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन कि चंचलता समाप्त होती है. इसे करने से पापों का नाश तो होता ही है साथ में धन की प्राप्‍त‍ि भी होती है. इसे करने से शरीर आरोग्‍य रहता है और मनोरोग नहीं होते. पापमोचनी एकादशी का व्रत आरोग्य, संतान प्राप्ति और प्रायश्चित के लिए भी किया जाता है. इस द‍िन ग्रहों को शांत करने के उपाय भी कारगर होते हैं.

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