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डोकलाम विवाद छूटा पीछे, भारत और चीन की सेनाएं करेंगी सालाना सैन्य अभ्यास

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जनरल रावत ने कहा कि चीन के साथ सैन्य कूटनीति ने काम किया और डोकलाम गतिरोध के बाद बंद हो गई सीमा सुरक्षा बलों की बैठक फिर से शुरू हो गई है.

 नई दिल्ली। डोकलाम विवाद को पीछे छोड़कर भारत और चीन नई शुरुआत की ओर बढ़ रहे हैं. दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त सैन्य अभ्यास करने जा रही हैं. सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि भारत और चीन का सालाना सैन्य अभ्यास बहाल होगा. उन्होंने यह भी कहा कि डोकलाम गतिरोध के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी और अब यह सुधर रहा है.

जनरल रावत ने कहा कि चीन के साथ सैन्य कूटनीति ने काम किया और डोकलाम गतिरोध के बाद बंद हो गई सीमा सुरक्षा बलों की बैठक फिर से शुरू हो गई है. उन्होंने कहा कि दोनों सुरक्षा बलों के बीच सौहार्द फिर से कायम हो गया है. सेना प्रमुख ने एक सवाल के जवाब में कहा कि  चीन के साथ हर साल सैन्य अभ्यास होता है. सिर्फ पिछले साल यह अभ्यास (डोकलाम गतिरोध को लेकर पैदा हुए तनाव की वजह से) स्थगित हुआ, लेकिन अब यह अभ्यास होगा.

भारत और चीन के सैन्यकर्मियों के बीच डोकलाम में73 दिनों तक गतिरोध रहा था. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अगले महीने चीन जा रही हैं और माना जा रहा है कि यह मुद्दा बातचीत के दौरान उठ सकता है.

भारत-चीन के बीच लंबा  विवाद चला

भूटान के पठार में स्थित डोकलाम को लेकर भारत और चीन के बीच पिछले साल काफी लंबा विवाद चला था. इस कारण दोनों देश की सेना आमने-सामने आ गई थी. ऐसा चीन के इस क्षेत्र में निर्माण कार्य करने को लेकर हुआ था. भौगोलिक रूप से डोकलाम भारत चीन और भूटान बार्डर के तिराहे पर स्थित है. इसकी भारत के नाथुला पास से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी है. चुंबी घाटी में स्थित डोकलाम सामरिक दृष्टि से भारत और चीन के लिए काफी महत्वपूर्ण है. साल 1988 और 1998 में चीन और भूटान के बीच समझौता हुआ था कि दोनों देश डोकलाम क्षेत्र में शांति बनाए रखने की दिशा में काम करेंगे, लेकिन वहां पर निर्माण कार्य कराने की वजह से भारत को इस विवाद में कूदना पड़ा. भारतीय सेना के कड़ा रुख के बाद चीन की सेना काफी समय बाद विवादित इलाके से वापस लौटी थी.

दरअसल. साल 1949 में भारत और भूटान के बीच एक संधि हुई थी, जिसमें तय हुआ था कि भारत अपने पड़ोसी देश भूटान की विदेश नीति और रक्षा मामलों का मार्गदर्शन करेगा. साल 2007 में इस मुद्दे पर एक नई दोस्ताना संधि हुई, जिसमें भूटान के भारत से निर्देश लेने की जरूरत को खत्म कर दिया गया और यह वैकल्पिक हो गया. इसी संधि के आधार पर भारत ने अपनी सेना भूटान के क्षेत्र में पड़ने वाले डोकलाम में घुसे चीनी सैनिकों को हटाने के लिए भेजा था.

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