BREAKING NEWS
post viewed 74 times

सरहद बनी दीवार, 27 साल बाद परिवार को छोड़ जाना पड़ा पाकिस्तान

india-pakistan-border21

27 साल भारत में बिताने वाले इस शख्स को अब 37 की उम्र में पाकिस्तानी मान उसके देश वापस भेज दिया गया है.

 नई दिल्ली: सरहदें किस तरह से एक परिवार को बांट सकती हैं. किस तरह से एक परिवार की खुशहाल जिंदगी को तबाह कर सकती है. इन दिनों मुंबई के एक परिवार को कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल, 27 साल पहले सिराज खान नाम का एक पाकिस्तानी बच्चा  10 साल की उम्र में गलती से भारत आ गया था.  एग्जा़म में फेल होने के कारण पिता के गुस्से से बचने के लिए वह घर से भागा और गलती से भारत पहुंच गया. यहां होटल-ढाबों में काम कर किसी तरह जीवन-यापन किया. 18 की उम्र में मुंबई में एक भारतीय महिला के साथ शादी की. तीन बच्चे हुए. जिंदगी के महत्वपूर्ण 27 साल भारत में बिताने वाले इस शख्स को अब 37 की उम्र में पाकिस्तानी मान उसके देश वापस भेज दिया गया है, जबकि उसकी पत्नी व तीनों बच्चे भारत में ही हैं.

HIGHLIGHTS

  • दस साल की उम्र में पिता से नाराज होकर छोड़ा था घर

  • गलत ट्रेन में सवार होने पर पहुंचा था भारत

  • अवैध रूप से भारत में रहने का चल रहा था केस

पत्नी और बच्चों को भारतीय ही माना गया है. सरहदों के फेर में पति से बिछड़ने वाली पत्नी का कहना है कि इतने सालों से वह भारत में थे. वह कानूनन भारत की नागरिकता के लिए कोशिश कर रहे थे. वह कहती हैं कि सरहदें हमारे लिए सरहदें नहीं रहीं, बल्कि खुशियों के बीच दीवार बन गई हैं. सरहदें खुशियों के लिए सिरदर्द बन गई हैं.

अवैध रूप से भारत में रहने का चल रहा था मामला

सिराज खान को पाकिस्तान भेजे जाने की यह खबर आम घटना नहीं है. मुंबई के एंटोप हिल इलाके में रहने वाले सिराज खान 27 साल से भारत में थे. मुंबई के सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरए किदवई मार्ग पुलिस स्टेशन, मुंबई की टीम सिराज को दिल्ली ले गई. यहां से उसे अमृतसर ले जाया गया. अमृतसर के अटारी बॉर्डर से उसे पाकिस्तान भेज दिया गया. उन्होंने बताया कि सिराज खान के खिलाफ भारत में अवैध रूप से रहने का मामला चल रहा था. दिसंबर, 2017 में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी द्वारा सिराज को बिना इजाजत इधर-उधर जाने को प्रतिबंधित किया गया था. आखिरकार सोमवार को उसे पाकिस्तान भेज दिया गया.

10 साल की उम्र में पिता से नाराज होकर छोड़ा था घर
सिराज खान की कहानी किसी फिल्म की तरह है. सिराज के अनुसार वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के जिला मनसेहरा के सरकुल इलाके के एक गांव का रहने वाला था. हालांकि दस्तावेजों में वह यह भी साबित नहीं कर सका. सिराज के मुताबिक 10 साल की उम्र में वह स्कूल में एग्ज़ाम में फेल हो गया. पिता की नाराजगी से बचने के लिए वह घर से भाग निकला. वह कराची में रहने वाले अपने अंकल के यहां जाना चाहता था, लेकिन गलत ट्रेन में सवार हो गया और अम्रतसर पहुंच गया. कुछ समय बाद वह यहां से गुजरात पहुंचा. गुजरात में उसने चिल्ड्रन रिमांड होम में शरण ली. आठ साल तक यहां रहने के बाद 18 साल की उम्र में बालिग होने पर उसे यहां से छोड़ दिया गया. इसके बाद वह मुंबई पहुंच गया.

2005 में मुंबई की साजिदा से की शादी, परिवार के लिए होटल में किया काम
सिराज जब मुंबई पहुंचा तब तक वह जवान हो चुका था. उसने सेटल मुंबई के रफी अहमद मार्ग एरिया में रहना शुरू किया. और 2005 में उसने मुंबई की ही रहने वाली भारतीय राष्ट्रीयता वाली साजिदा से शादी कर ली. साजिदा से शादी के बाद वह मुंबई के एंटोप हिल इलाके में रहने लगा. शादी के बाद सिराज और साजिदा को तीन बच्चे हुए, जो पढ़ते हैं. सिराज देश के अलग-अलग शहरों में रहकर किसी तरह अपने खाने-पीने और रहने का इंतजाम करता रहा. साजिदा से शादी के बाद सिराज ने एंटोप हिल में घर बनाया और परिवार के भरण-पोषण के लिए एक होटल में वेटर के रूप में काम करने लगा.

2009 में पहली बार हुई थी कार्रवाई
सिराज खान के अवैध रूप से पाकिस्तान रहने का पता चलने 2009 में चला. मुंबई पुलिस ने बताया कि जांच के बाद 2013 में सीआईडी ने सिराज के घर छापा मारा. सिराज ने खुद को पाकिस्तान अधिकत कश्मीर के मनसेहरा गांव का रहने वाला बताया, लेकिन वह दस्तावेजों के जरिए यह भी साबित नहीं सका. 4 जनवरी, 2014 को ‘फॉरनर्स एक्ट, 1946 एंड पासपोर्ट रूल्स’ के तहत दोषी पाए जाने पर सिराज को सात महीने की जेल हुई. बाद में कोर्ट ने सिराज को वापस पाकिस्तान भेजने का आदेश दिया. कोर्ट ने सिराज को नजरबंद भी किया. 7 अक्टूबर, 2014 को सिराज पर बिना इजाजत इधर-उधर होने का फॉरनर्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया. एक अधिकारी ने बताया कि अगर सिराज को इसमें दोषी पाया जाता तो उसे पांच साल तक की सजा हो सकती थी. राज्य सरकार ने यह केस वापस लेते सिराज को वापस भेजने का फैसला किया.

पति की नागरिकता के लिए परेशान थी साजिदा
साजिदा ने बताया, इससे पहले उसने वकील के माध्यम से इस आदेश के खिलाफ एप्लीकेशन फाइल किया, लेकिन सिराज को वापस पाकिस्तान भेजे जाने का आदेश नहीं टल सका. सिराज ने भी भारतीय नागरिकता के लिए एप्लाई किया था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. सिराज के पाकिस्तान भेजे जाने के बाद मुंबई में ही रह गई पत्नी साजिदा कहती है कि तीन बच्चे हैं. उन्हें पालने के लिए उसे घरों में काम करना पड़ रहा है. आगे क्या होगा, बच्चों को उसके पिता कब कैसे मिलेंगे, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है. अब मैं और बच्चे भारतीय और पति पाकिस्तानी घोषित हो गए. सरहद उसके परिवार के लिए दीवार बन गई है.

SHAREShare on Facebook0Share on Google+0Tweet about this on TwitterShare on LinkedIn0

Be the first to comment on "सरहद बनी दीवार, 27 साल बाद परिवार को छोड़ जाना पड़ा पाकिस्तान"

Leave a comment

Your email address will not be published.


*