नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में दायर सभी हस्तक्षेप याचिकाअों को खारिज कर दिया है। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ‘मेरे मौलिक अधिकार मेरे संपत्ति के अधिकारों की तुलना में अधिक हैं’

हाई कोर्ट आदेश के खिलाफ सबसे पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लिहाजा पहले बहस करने का मौका उन्हें मिल सकता है। इस मामले से जुड़ें 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत, अरबी सहित विभिन्न भाषषाओं में हैं, जिस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी।

बता दें कि इससे पहले 8 फरवरी को अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई हुई थी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर की पीठ में सभी पक्षों ने दस्तावेजों के जरिए अपना पक्ष रखा था।

दस्तावेज तैयार करने का दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दो हफ्ते में दस्तावेज तैयार करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह साफ किया कि इस मामले में अब कोई नया पक्षाकार नहीं जुड़ेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ के इस विवादित स्थल को इस विवाद के तीनों पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और भगवान राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था।