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इससे पहले भी इन राज्यों में उपचुनाव हार चुकी है भाजपा

Yogi-Raje-Shivraj

राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगे हैं कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है, वहीं क्यों पार्टी की हार हो रही है.

नई दिल्ली. यूपी के उपचुनावों में हार से राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगे हैं कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है, वहीं क्यों पार्टी की हार हो रही है. न सिर्फ भाजपा के रणनीतिकारों, बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी ये सवाल अहम हैं. क्योंकि यूपी से पहले मध्यप्रदेश में भाजपा उपचुनाव हारी, जबकि यहां पिछले 15 वर्षों से पार्टी सत्ता में है. राजस्थान में हुए लोकसभा और विधानसभा की सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी हार गए. वहां भी भाजपा सत्ता में है.
इसके अलावा बिहार में भी भाजपा पिछले कुछ महीनों से सत्ता में है. सीएम नीतीश कुमार के राजद के साथ महागठबंधन बना लेने और लगभग दो साल तक सत्ता चला लेने के बाद भाजपा ने एक नाटकीय घटनाक्रम के बाद फिर नीतीश कुमार से हाथ मिलाते हुए प्रदेश की सत्ता में भागीदारी पाई थी. बिहार में अररिया का लोकसभा उपचुनाव सरकार में सत्तारूढ़ इस राजग गठबंधन के लिए इसीलिए महत्वपूर्ण हो गया था. क्योंकि अररिया का क्षेत्र राजद के दिग्गज नेता दिवंगत तस्लीमुद्दीन का इलाका रहा है. वहां से अगर राजग को उपचुनाव में भी जीत मिलती तो इससे पूरे बिहार में नीतीश और भाजपा के गठजोड़ पर मुहर लगनी तय थी. लेकिन उपचुनाव में जदयू से राजद में गए दिवंगत तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज की उपचुनाव की जीत से भाजपा को इस राज्य में भी सफलता नहीं मिल सकी.

मध्यप्रदेश में भी शिवराज का नहीं चला था जादू
यूपी उपचुनाव से ठीक पहले मध्यप्रदेश में कोलारस और मुंगावली विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए थे. ये दोनों सीटें कांग्रेस के कब्जे वाली थीं. एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन दोनों क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के दौरान जनता से जमकर चुनावी वादे किए. यहां तक कहा कि कुछ महीनों के लिए ही सही, भाजपा को मौका दें, सही न लगने पर आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा को हरा देना. लेकिन जनता ने नहीं सुनी. उपचुनाव में भाजपा को नकार दिया गया. यह चुनाव भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि ये दोनों सीटें कांग्रेस के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाली सीटें थीं. यहां पर चुनाव जीतने का मकसद न सिर्फ कांग्रेस को हराना था, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बढ़ते प्रभाव को भी रोकना था. लेकिन दर्जनों मंत्रियों व सांसदों के लगातार आक्रामक चुनाव प्रचार के बावजूद भाजपा ये दोनों सीटें हार गईं. मध्यप्रदेश में सिर्फ इन्हीं दोनों सीटों की ही बात नहीं है, भाजपा ने पिछले एक साल में चार उपचुनावों में यहां अपनी सीटें खोयी हैं. कोलारस और मुंगावली से पहले चित्रकूट, अटेर और झाबुआ लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनावों में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था.

राजस्थान में एक साथ तीन सीटों पर हुई थी हार
एमपी के उपचुनावों से पहले राजस्थान में लोकसभा की दो सीटों अलवर और अजमेर तथा भीलवाड़ा की मांडलगढ़ विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हुए थे. इन तीनों ही सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था. मध्यप्रदेश के साथ ही राजस्थान में भी इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में उपचुनावों की हार ने पार्टी के भीतर खलबली मचा दी. राज्य भाजपा इकाई के नेताओं ने जहां उपचुनावों में हार का ठीकरा सीएम वसुंधरा राजे पर फोड़ने की कोशिश की, वहीं कुछ स्थानीय नेता प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ सीधी बगावत पर उतर आए. भाजपा की कोटा इकाई के ओबीसी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को चिट्ठी लिखकर कहा कि सीएम वसुंधरा राजे और प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली से पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हैं. इसलिए जल्द से जल्द पार्टी को प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन कर देना चाहिए. चौधरी ने कुछ दिनों तक अपने पत्र का जवाब न मिलने पर मीडिया के जरिए पार्टी आलाकमान को रिमाइंडर भी कराया. साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन नहीं होता है तो भाजपा के लिए आगामी विधानसभा चुनाव जीतना कठिन हो जाएगा. अशोक चौधरी के सवाल से प्रदेश भाजपा अभी जूझ ही रही थी कि इतने में विधायक ज्ञानदेव आहूजा का कथित ऑडियो वायरल हो गया, जिसमें वे भी प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाते दिख रहे हैं.

राजनीति को समझने वाले विशेषज्ञ उपचुनावों की हार के इन संकेतों को भाजपा के लिए खतरा बता रहे हैं. वास्तव में ये संकेत चेतावनी देने वाले हैं. और सवाल भी उठाते हैं कि आखिर क्यों जिन-जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है, वहां होने वाले उपचुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ रहा है. पार्टी को इन संकेतों को गहराई से और तत्काल समझना होगा, तभी 2019 के आम चुनावों की तैयारी पुरजोर तरीके से की जा सकेगी.

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