नई दिल्‍ली – उत्‍तर प्रदेश की दो और बिहार की एक लोकसभा सीट पर सभी की निगाह लगी हुई है। इनमें सबसे अहम यूपी के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा की सीट है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इनमें से एक सीट पर सूबे के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ और दूसरी सीट पर सूबे के उप मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या सांसद रह चुके हैं। बहरहाल इन दोनों ही सीटों पर यदि आप नजर डालेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि इन सीटों की कितनी अहमियत है। अररिया सीट पर राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार सरफराज आलम ने 57358 मतों से जीत हासिल की है।

फूलपुर

नेहरू थे यहां से सांसद

फूलपुर की ही यदि बात की जाए तो यहां से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर मौर्या तक सांसद रहे चुके हैं। पंडित नेहरू तो यहां से तीन बार सांसद रहे। 1952, 1957 और 1962 में उन्‍होंने यहां का प्रतिनिधित्‍व किया था। 1957 में भी कांग्रेस को जबरदस्‍त जीत तो जरूर मिली थी, लेकिन वह सवालों में घिर गई थी। इतना ही 1964 में जिस वक्‍त प्रधानमंत्री रहते हुए उनका निधन हुआ था तब भी वह फूलपुर से ही सांसद थे। इसके बाद जब यहां पर उप चुनाव हुए तो इस सीट से विजय लक्ष्‍मी पंडित जो नेहरू की बहन थीं विजयी हुई थीं। इससे पहले वह सोवियत यूनियन समेत, ब्रिटेन और यूएस में राजदूत की भी भूमिका निभा चुकी थीं। सांसद चुने जाने से पहले वह महाराष्‍ट्र की गवर्नर थीं। वह लगातार 1967 तक इस सीट पर कांग्रेस का प्रतिनिधित्‍व करती रहीं थीं।

मिश्र से लेकर वीपी‍ सिंह तक जीते

सक्रिय राजनीति से विदा लेने के बाद इस सीट पर 1969 में फिर उपचुनाव हुए लेकिन इस बार यहां से कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा और यहां से समयुक्‍त सोशलिस्‍ट पार्टी के जनेश्‍वर मिश्र को जबरदस्‍त जीत मिली थी। मिश्र भी लेकिन यहां से ज्‍यादा समय तक सांसद नहीं रह सके। 1971 में हुए चुनाव में कांग्रेस के उम्‍मीद्वार के रूप में वीपी सिंह ने फिर पार्टी को जीत दिलवाई थी। 1977 में हुए चुनाव में यहां से फिर कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी। इस बार यहां से भारतीय लोकदल के कमला बहुगुणा ने जीत दर्ज की थी।

लगातार बदलते रहे सांसदों के चेहरे

1980 में यहां से जनता पार्टी सेक्‍युलर से बीडी सिंह ने जीत हासिल की। लेकिन विजय लक्ष्‍मी पंडित के बाद से कोई भी नेता यहां से दोबारा जीत दर्ज करने में असफल रहा था। 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां से राम पूजन पटेल ने जीत दर्ज की। जल्‍द ही उनका मोह कांग्रेस से भंग हो गया और 1989 और 1991 के दौरान हुए चुनाव में वह जनता दल के प्रतिनिधि के तौर पर जीत दर्ज कर पाने में सफल हुए थे। 1979-1984 तक इस सीट पर लगातार सांसदों के चेहरे और पार्टियां बदलती रहीं।

पहली बार भाजपा के खाते में गई थी फूलपुर की सीट

1996 से 2004 तक यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में जाती रही है। 1996 में यहां से समाजवादी पार्टी के उम्‍मीद्वार के रूप में जंग बहादुर पटेल चुनाव जीत कर सांसद बने। 1998 में भी उन्‍होंने दोबारा यहां से जीत दर्ज की थी। 1999 में फिर यहां पर चुनाव हुए ओर सपा के धर्मराज पटेल ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2004 में यहां से अतीक अहमद जीते और सांसद बने थे। 2009 में फिर यहां पर बदलाव हुआ और बसपा के उम्‍मीद्वार कपिल मुनी करवारिया ने जीत दर्ज की। लेकिन 2014 के चुनाव में यहां से भाजपा उम्‍मीद्वार केशव प्रसाद मौर्या ने जीत दर्ज की थी। उन्‍होंने अपने प्रतिद्वंदी को यहां से करीब 5 लाख से अधिक मतों से हराया था। मौर्या के रूप में यह सीट पहली बार भाजपा के खाते में गई थी। लेकिन 2018 में हुए उपचुनाव में यहां से समाजवादी पार्टी के उम्‍मीद्वार ने जीत दर्ज की है। फूलपुर सीट पर सपा प्रत्याशी नागेंद्र पटेल ने भाजपा उम्मीदवार कौशलेंद्र पटेल को 59,613 मतो से शिकस्त दी है।

गोरखपुर

पांच बार सांसद रहे योगी आदित्‍यनाथ

गोरखपुर में अब तक 13 बार लोकसभा सीट के लिए चुनाव हुआ है। इनमें 1998 से 2017 तक करीब पांच बार योगी आदित्‍यनाथ अपनी जीत दर्ज करने में कामयाब रहे हैं। उनके अलावा महंत अवैद्यनाथ भी करीब पांच बार ही यहां से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे हैं। उन्‍होंने पहले 1970-71 में स्‍वतंत्र उम्‍मीद्वार के तौर पर जीत दर्ज की। इसके बाद 1989-1998 तक वह लगातार यहां से सांसद चुने गए थे। उनसे पहले इस सीट से महंत दिगविजय नाथ ने स्‍वतंत्र उम्‍मीद्वार के तौर पर जीत दर्ज की थी। इनके अलावा 1977-1989 के बीच यहां से तीन बार कांग्रेस और एक बार भारतीय लोकदल के प्रतिनिधि ने भी जीत दर्ज की थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से योगी आदित्‍यनाथ को जहां करीब 5 लाख 40 हजार मत मिले थे वहीं सपा प्रत्‍याशी राजमति निषाद को 2 लाख 26 के करीब वोट हासिल हुए थे। इस सीट पर योगी हर बार हुए चुनाव में पहले से अधिक मतों से जीत दर्ज करवाने में सफल हुए हैं