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फसलों के समर्थन मूल्य पर पीएम मोदी ने विपक्ष को लिया आड़े हाथ; तो राहुल ने पूछा, कब बढ़ा रहे हैं MSP

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प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के एमएसपी फैसले के बारे में ‘कई लोग भ्रम फैला रहे हैं और निराशा का माहौल बना रहे हैं.’

 नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हुए शनिवार (17 मार्च) को कहा कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य उनकी उत्पादन लागत के डेढ गुना पर तय करने की बजट घोषणा को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. उन्होंने किसानों को भरोसा दिया कि समर्थन मूल्य की घोषणा करते समय सभी प्रमुख लागतों को इसमें शामिल किया जायेगा. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इस बारे में पहले से ही राज्य सरकारों के साथ काम कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य( एमएसपी) का किसानों को पूरा लाभ मिले.

डंठल और पराली नहीं जलाने की अपील
प्रधानमंत्री यहां भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) मेला ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय कृषि उन्नति मेला- 2018 में बोल रहे थे. उन्होंने इस अवसर पर प्रदूषण कम करने के लिये किसानों से खेतों में फसलों के बचे डंठल और पराली नहीं जलाने की भी अपील की. मोदी ने किसानों से कहा कि खाद्य तेलों की आयात पर निर्भरता कम करने के लिये उन्हें ज्यादा से ज्यादा तिलहन की पैदावार करनी चाहिये. इसके साथ ही उन्होंने यूरिया खपत को भी 2022 तक घटाकर आधा करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि 2018- 19 के बजट में सरकार ने किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने का फैसला किया है.‘‘ यह फैसला किया गया है कि सभी अधिसूचित फसलों का एमएसपी उनपर आने वाली लागत का कम से कम डेढ गुना होना चाहिये.

एमएसपी पर ‘कई लोग भ्रम फैला रहे हैं’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के एमएसपी फैसले के बारे में ‘कई लोग भ्रम फैला रहे हैं और निराशा का माहौल बना रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि फसलों की उत्पादन लागत तय करते हुये उसमें श्रमिक लागत, मशीनों, पशुओं, उर्वरक, बीज पर आने वाला खर्च, राज्य सरकारों को दिया जाने वाला राजस्व, कार्यशील पूंजी पर ब्याज और पट्टे की जमीन का किराया आदि शामिल किया जायेगा.

केंद्र का कृषि विपणन को मजबूत बनाने पर जोर
मोदी ने कहा कि सरकार कृषि विपणन को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रही है. किसानों की आय बढ़ाने के लिये ग्रामीण मंडियों को एपीएमसी थोक मंडियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं. हाल में पेश बजट में ग्रामीण खुदरा कृषि बाजार का प्रस्ताव किया गया है. 22,000 ग्रामीण हाट को जरूरी ढांचागत सुविधाओं के साथ उन्नत बनाने और उन्हें कृषि उपज विपणन समिति( एपीएमसी) तथा ई- नाम प्लेटफार्म के साथ जोड़ने की घोषणा की गई है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खेती की उत्पादन लागत में किसानों और उनके परिवार सदस्यों का श्रम योगदान भी शामिल होगा. ‘‘यह मेहनतकश किसानों कि आय से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला है.’’ वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि उत्पादन लागत में सरकार ‘ए2 जमा एफएल’ को शामिल करेगी. इसमें खेती में काम आने वाले विभिन्न सामानों और कच्चे माल की लागत और किसान परिवार की श्रम लागत भी शामिल होगी. हालांकि, कुछ किसान संगठन वृहद लागत की बात कर रहे हैं. उनके मुताबिक इसमें ‘एम2 जमा एफएल’ के अलावा ली गई भूमि का किराया और पूंजी पर देय ब्याज भी शामिल होना चाहिये. प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि किसान अपनी उपज को कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) के जरिये भी बेहतर तरीके से बेच सकते हैं. बजट में इन संगठनों को सहकारी समितियों की तर्ज पर आयकर से मुक्त कर दिया गया है.

  1. केंद्र का कृषि विपणन को मजबूत बनाने पर जोर
  2. पीएम ने की ई-मार्केटिंग पोर्टल की शुरुआत
  3. चकाचौंध को भुलाकर हमें बताएं कब बढ़ेगी एमएसपी: राहुल

पीएम ने की ई-मार्केटिंग पोर्टल की शुरुआत
मोदी ने इस अवसर पर जैविक उत्पादों के विपणन के लिये ई-मार्केटिंग पोर्टल की शुरुआत की. उन्होंने इसे कृषि विपणन सुधारों के क्षेत्र में एक नया अध्याय बताया. इससे किसानों का काफी फायदेमंद बताया. उन्होंने कहा कि खेती की लागत कम करने के लिये सरकार ने अनेक कदम उठाये हैं. मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किये हैं, नीम लेपित यूरिया देनी शुरू की है और सिंचाई की लंबित परियोजनाओं को पूरा किया जा रहा है. इसके लिये 80,000 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं.

कृषि क्षेत्र के सामने कई चुनौतियां
मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिये सरकार समग्र प्रयास कर रही है और 2022 तक किसानों की आय को दुगुना करने के लिये प्रतिबद्ध है. किसानों की आय बढ़ाने के लिये उन्होंने मधुमक्खी पालन, सौर फार्मिंग, जैविक खेती, बांस की खेती और जैवअपशिष्ट प्रबंधन जैसे कार्यों को अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने किसानों से कृषि मशीनरी का इस्तेमाल करने और पराली और फसलों के डंठल जलाने पर रोक लगाने की अपील की.

किसानों के लिये कई आदर्श कानून बनाये
उन्होंने कहा कि किसानों के कल्याण के लिये केन्द्र ने कई आदर्श कानून बनाये हैं और राज्यों से इन्हें अमल में लाने का आग्रह किया है. प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 25 कृषि विज्ञान केन्द्रों का शिलान्यास किया. इसके साथ इन केन्द्रों की संख्या 700 तक पंहुच जायेगी. उन्होंने इस मौके पर कृषि कर्मण और पंडित दीन दयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किये.

चकाचौंध को भुलाकर हमें बताएं कब बढ़ेगी एमएसपी: राहुल
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि वह सही-सही बताएं कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) उत्पादन लागत का डेढ़ गुना करने के वादे कब पूरा करने जा रहे हैं. मोदी की ओर से एक कार्यक्रम में एमएसपी तय करने को लेकर बजट में लिए गए फैसले के बारे में भ्रांति फैलाने की बात कहे जाने पर राहुल ने एक ट्वीट में प्रधानमंत्री की आलोचना की और कहा, “कृषि उन्नति मेला 2018 में अपने भाषण में ‘सरकारी मशीनरी के पीआर (जनसंपर्क) चकाचौंध’ के बारे में भूल जाइए. मोदीजी, क्या आप कृपया किसानों को बता सकते हैं कि कब आप उनका लाभ 50 फीसदी बढ़ाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करेंगे और हजारों किसानों को खुदकुशी नहीं करनी पड़ेगी? क्या आपको यह वादा याद है?”

कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पर किसानों से 2022 तक उनकी आमदनी दोगुनी करने के खोखले वादे करने का भी आरोप लगाया. दिल्ली में हुई पार्टी की दो दिवसीय बैठक में कांग्रेस ने कहा कि सरकार अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है और भाजपा सरकार ने 2022 में किसानों की आमदनी दोगुनी करने के खोखले वादे करके किसानों के साथ धोखा किया है.

कांग्रेस का आरोप है कि फसल बीमा योजना का लाभ किसानों से ज्यादा निजी बीमा कंपनियों को मिली है, क्योंकि किसानों की सहमति के बिना ही उनके बैंक खातों से पैसे ले लिए गए. कांग्रेस ने कहा, “भाजपा की किसान विरोधी मानसिकता की पोल खुल गई है क्योंकि एनडीए के दूसरी बार सत्ता (2014-18) में आने और पहले शासन काल (1998-2004) के दौरान कृषि विकास दर मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सकार के शासन काल के मुकाबले गिरकर आधी रह गई.”

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